कोंडागांव में डुप्लीकेट वोटर आईडी प्रिंट होने का मामला मतदाताओं को जानकारी नहीं होने का दावा, कलेक्टर-एसडीएम स्तर पर जांच जारी
कोंडागांव। छत्तीसगढ़ में इन दिनों युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। इसी बीच कोंडागांव जिले में कथित तौर पर बड़ी संख्या में डुप्लीकेट मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) प्रिंट कराकर गांव-गांव ले जाने का मामला सामने आया है। मामले को लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर तथा संबंधित अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष शिकायत पहुंचने की जानकारी सामने आई है। फिलहाल मामले की जांच जारी बताई जा रही है।जिनके नाम पर कार्ड, उन्हें जानकारी नहीं होने का दावामिली जानकारी के अनुसार, कथित रूप से तैयार किए गए कुछ डुप्लीकेट वोटर आईडी कार्ड की जानकारी संबंधित मतदाताओं से लिए जाने पर कुछ लोगों ने अपने नाम से ऐसी प्रति तैयार होने की जानकारी से अनभिज्ञता जताई है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है कि किसी मतदाता की जानकारी या सहमति के बिना उसके नाम से मतदाता पहचान पत्र की प्रति तैयार की गई, तो यह गंभीर जांच का विषय होगा कि संबंधित दस्तावेज की जानकारी या डिजिटल प्रति किस माध्यम से प्राप्त की गई।ऑनलाइन प्रक्रिया और प्रमाणीकरण पर भी उठे सवाल मामले के सामने आने के बाद मतदाता पहचान पत्र से जुड़ी ऑनलाइन प्रक्रिया और प्रमाणीकरण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि कथित डुप्लीकेट प्रतियां किस माध्यम से प्राप्त की गईं और उन्हें प्रिंट कराने की प्रक्रिया क्या थी।साथ ही यह भी जांच का विषय है कि संबंधित मतदाताओं के दस्तावेज या डिजिटल जानकारी किसी अन्य व्यक्ति तक कैसे पहुंची और कथित तौर पर तैयार की गई प्रतियों का उद्देश्य क्या था।शिकायत के बाद प्रशासनिक जांच शुरू शिकायत जिला प्रशासन एवं निर्वाचन अधिकारियों तक पहुंचने के बाद मामले की जांच शुरू होने की जानकारी है। जांच में यह स्पष्ट किया जाना है कि कितने मतदाता पहचान पत्रों की प्रतियां तैयार की गईं, किन मतदाताओं के नाम पर तैयार की गईं और इन्हें किस माध्यम से प्रिंट कराया गया।इसके अलावा, इन प्रतियों को किस उद्देश्य से तैयार किया गया तथा क्या इनका किसी चुनावी प्रक्रिया में उपयोग किया गया, यह भी जांच के प्रमुख बिंदुओं में शामिल हो सकता है। जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति मामले को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हैं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि कथित रूप से तैयार की गई डुप्लीकेट वोटर आईडी का इस्तेमाल मतदान या किसी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया गया था या नहीं।जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यदि जांच में निर्वाचन संबंधी दस्तावेजों के अनधिकृत उपयोग, प्रिंटिंग या वितरण की पुष्टि होती है, तो संबंधित नियमों के तहत जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई का निर्धारण किया जा सकता है।फिलहाल मामले में प्रशासनिक जांच रिपोर्ट का इंतजार है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामला केवल डुप्लीकेट प्रति तैयार किए जाने तक सीमित है या इसके पीछे किसी व्यापक उद्देश्य अथवा चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कोई अन्य भूमिका थी।

