अक्टूबर 30, 2026

प्रेस क्लब मस्तूरी में कुर्सी की खींचतान या पत्रकारों के हितों की लड़ाई? रजिस्ट्रार के आदेश ने खोली तस्वीर,विपक्षियों का शिकायत बेअसर।

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विमल कांत की रिपोर्ट

Hindtimes news24x7 मस्तूरी। प्रेस क्लब मस्तूरी की सदस्यता और कार्यकारिणी को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में सहायक रजिस्ट्रार, फर्म्स एवं संस्थाएं, बिलासपुर संभाग ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। 28 अक्टूबर 2026 को जारी इस आदेश में शिकायतकर्ताओं के आरोप पर्याप्त दस्तावेजी प्रमाणों के अभाव में प्रमाणित नहीं पाए गए।

इससे वर्तमान पदाधिकारियों और सदस्यों को राहत मिली है। मामले में संतोष सिंह क्षत्री एवं अन्य ने संस्था की सदस्यता और कार्यकारिणी गठन को लेकर शिकायत की थी। विजय सुमन एवं अन्य ने संस्था के पंजीकृत नियमों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर अपना पक्ष रखा। सहायक रजिस्ट्रार ने दोनों पक्षों के दस्तावेजों, अभिलेखों और वैधानिक प्रावधानों की जांच के बाद स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ताओं ने आरोपों के समर्थन में जरूरी प्रमाण पेश नहीं किए। धारा 40 के अंतर्गत अपील का भी कोई अभिलेख कार्यालय में नहीं मिला। आदेश में कहा गया कि केवल आपत्ति या दावा पेश करने से किसी वैधानिक अभिलेख को निरस्त नहीं किया जा सकता।आदेश में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई कि 17 दिसंबर 2024 को जारी कार्यकारिणी सूची के खिलाफ किसी उच्च फोरम से स्थगन आदेश प्राप्त नहीं है। इसलिए पूर्व में जारी कार्यकारिणी के संबंध में लगाए गए आरोप भी उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणित नहीं पाए गए। सहायक रजिस्ट्रार ने विवाद समाप्त कर लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से निर्देश दिए हैं। शिकायतकर्ताओं और अन्य पात्र व्यक्तियों को सदस्यता में शामिल करते हुए पंजीकृत नियमावली के अनुसार सदस्यता पंजिका, आवेदन और अन्य अभिलेख व्यवस्थित किए जाएं। साथ ही स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर 90 दिनों के अंदर पालन प्रतिवेदन पेश किया जाए।इस आदेश से साफ है कि वर्तमान पदाधिकारियों और सदस्यों के खिलाफ लगाए गए आरोप पर्याप्त प्रमाणों से सिद्ध नहीं हो सके। अब संस्था के संचालन में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कार्यकारिणी पर होगी। प्रेस क्लब मस्तूरी के सचिव रघु यादव ने कहा कि बिना ठोस तथ्यों और प्रमाणों के संस्था की कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठाना और बार-बार आरोप लगाकर छवि धूमिल करने का प्रयास उचित नहीं है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल उठाने का अधिकार सबको है, लेकिन व्यक्तिगत द्वेष या अनावश्यक विवाद पैदा करना सही नहीं। उन्होंने कहा कि संस्था किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि पत्रकारों के सामूहिक हितों और सम्मान से जुड़ा संगठन है। सहायक रजिस्ट्रार के आदेश से आरोप प्रमाणित नहीं हो सके हैं। वर्तमान सदस्य और पदाधिकारी वैधानिक प्रक्रिया से पीछे नहीं हट रहे हैं। नियमावली के अनुरूप सदस्यता, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक चुनाव के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। सकारात्मक सुझावों का स्वागत रहेगा, लेकिन व्यक्तिगत दुर्भावना से माहौल बिगाड़ना उचित नहीं। अब सभी को व्यक्तिगत विवादों से ऊपर उठकर पत्रकारों की एकता, संगठन की मजबूती और संस्था के सम्मान के लिए काम करना चाहिए।

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