
विमल कांत की रिपोर्ट
Hindtimes news24x7 बिलासपुर। जिले में निजी (अशासकीय) स्कूलों द्वारा किताबों, कॉपियों और अन्य शैक्षणिक सामग्री की जबरन बिक्री को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी ने सख्त रुख अपनाया है। जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अब कोई भी स्कूल छात्रों या उनके पालकों को किसी एक निर्धारित दुकान से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा।
दरअसल, पिछले कुछ समय से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल अपने निर्धारित दुकानों के माध्यम से महंगी किताबें, कॉपियां और अन्य सामग्री खरीदने के लिए दबाव बना रहे थे। इससे पालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा था। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने यह सख्त निर्देश जारी किया है।आदेश के अनुसार, सभी स्कूलों को केवल निर्धारित पाठ्यक्रम जैसे NCERT/SCERT की पुस्तकों को ही प्राथमिकता देनी होगी। साथ ही स्कूल परिसर में किसी भी प्रकार की किताब या कॉपी की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है। प्रत्येक विद्यालय को अपनी पुस्तक सूची स्कूल के नोटिस बोर्ड एवं वेबसाइट पर सार्वजनिक करना अनिवार्य किया गया है, ताकि पालकों को पारदर्शिता के साथ जानकारी मिल सके।इसके अलावा, स्कूल प्रबंधन द्वारा अनावश्यक गाइड, प्राइवेट प्रकाशनों की महंगी किताबें या अन्य सामग्री खरीदने के लिए छात्रों को बाध्य नहीं किया जा सकेगा। किसी भी पुस्तक या कॉपी पर स्कूल का नाम छपवाना भी अनिवार्य नहीं रहेगा। सत्र के बीच में किताबें या पाठ्यक्रम बदलने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है।जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।इस निर्णय से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब वे अपनी सुविधा और बजट के अनुसार कहीं से भी किताबें और कॉपियां खरीद सकेंगे। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।









