
विमल कांत की रिपोर्ट
Hindtimes news मस्तूरी त्रैमासिक परीक्षा 2025-26 का आयोजन 23 सितंबर से प्राथमिक कक्षाओं (पहली से पांचवीं) एवं उच्च प्राथमिक कक्षाओं (छठवीं से आठवीं) में किया जा रहा है। लेकिन इन परीक्षाओं की तस्वीर और हकीकत बेहद चौंकाने वाली है। जहां परीक्षा अनुशासन और गोपनीयता के साथ होनी चाहिए, वहीं यहां नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
नियमानुसार बच्चों को दूर-दूर बैठाकर, प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिका देकर परीक्षा लेनी होती है। लेकिन वास्तविकता यह है कि शिक्षक स्वयं ब्लैकबोर्ड पर प्रश्न लिखवा रहे हैं और बच्चे झुंड बनाकर एक-दूसरे की कॉपियों से नकल कर रहे हैं। यहां तक कि बच्चों को पेज पढ़वाकर परीक्षा कराने जैसी लापरवाहियां सामने आई हैं। इससे साफ है कि त्रैमासिक परीक्षा केवल नाम मात्र की औपचारिकता बनकर रह गई है।इस लापरवाही को लेकर शिक्षकों का तर्क है कि खंड शिक्षा अधिकारी ने उन्हें अपने स्तर से परीक्षा कराने की बात कही है। वहीं, एबीओ एक्का ने सफाई देते हुए कहा कि शिक्षक ब्लैकबोर्ड पर प्रश्न लिख सकते हैं, लेकिन बच्चों को झुंड बनाकर बैठने देना पूरी तरह गलत है। यह शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि परीक्षा अनुशासन और नियमों के अनुसार संपन्न हो।
स्थिति यह साफ कर देती है कि शिक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। सवाल यह है कि जब परीक्षा ही मज़ाक बन जाए तो बच्चों के भविष्य और पढ़ाई की गंभीरता को कौन संभालेगा








